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क्यू मशगुल है. तू तेरे ही रंग में
हालातो से सिख जा. बनाले अपने रास्ते
कब तक तू रहेंगा. अनजान सबसे
लगा दे पूरा जोर. अपने भीतर से
थक सा गया हु.
भीड़ भाड़ के शहर में.
थोड़ा सा सुकून
अभ चाहता हु.
लेकर आस चला जा रहा हु.
खूबसूरत सा पल में चाहता हु.


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