माना दिल है मेरा बेवकूफ़ हर बार गलतिया करता है खुद को कोसता है रोता है फिर भी तेरी फिकर करता है.. क्या जादू है तेरी दोस्ती का तेरे दर्द से मुझे दर्द होता है.. क्या करु... दिल है मेरा बेवकूफ हर बार गलतिया करता है ये प्यार ही है दोस्ती का जो हम दोनों को जोड़ रखा है खोना नही तुम्हे चाहता. ये दिल रोने लगा है... क्या करु... दिल है मेरा बेवकूफ हर बार गलतिया करता है वो हसीन पल का इंतजार ये दिल सालो से करता है तू खुश रहे. बेफिकर रहे ये दिल मन्नते करता है.. क्या करु... दिल है मेरा बेवकूफ हर बार गलतिया करता है हो गई गलती अभ.. दोनों कान में पकड़ता हु दिल का में इतना नही बुरा हमेशा तेरी फिकर करता हु.. क्या करु... दिल है मेरा बेवकूफ हर बार गलतिया करता है